सरगुजा ,छत्तीसगढ़ राज्य का एक जिला है। जिले का गठन 15 अगस्त ,1947 को किया गया।

गठन के बाद जिले की स्थापना 1 नवंबर 1948 को की गयी। इसका जिला मुख्यालय अम्बिकापुर है,साथ ही साथ यह संभाग भी है।

सरगुजा जिले का प्रथम प्रशासनिक विभाजन 25 मई 1998 को किया गया जिससे बाद कोरिया जिला अस्तित्व में आया। उसके बाद द्वितीय विभाजन 1 जनवरी 2012 को किया गया जिसके बाद सूरजपुर,बलरामपुर-रामानुजगंज अस्तित्व में आये।

सरगुजा जिले का क्षेत्रफल 5019.80 वर्ग किमी है।

यहाँ 7 तहसील अम्बिकापुर,लखनपुर,उदयपुर,लुण्ड्रा,सीतापुर,बतौली और मैनपाट गठित किये गये हैं,इन्ही 7 को विकासखंड के रूप में भी स्थापित किया गया है। वहीं 7 विकासखंडों को आदिवासी विकासखण्ड घोषित किया गया है।

सरगुजा जिले को 3 विधानसभा क्षेत्र अम्बिकापुर,लुण्ड्रा व सीतापुर में विभक्त किया गया है। जिनमें लुण्ड्रा व सीतापुर को अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए सीट आरक्षित किया गया है।

राजस्व अनुविभाग अम्बिकापुर और सीतापुर है।

वहीं अगर लोकसभा क्षेत्र की बात की जाये तो 1 है जिसका क्रमांक 09 है।

वर्तमान में यानी 2019 तक कुल 399 ग्राम पंचायतें हैं। अम्बिकापुर नगर निगम तथा 2 नगर पंचायत सीतापुर व लखनपुर है।

सरगुजा में मुख्य बोली सरगुजिहा,कुडूख और कोड़ाकू है।

छत्तीसगढ़ में एकमात्र सैनिक स्कूल (देश का 23वां सैनिक स्कूल) मेंण्ड्राकला में अवस्थित है।

सरगुजा की जलवायु उष्णकटिबंधीय मानसूनी है।

सरगुजा की सीमा से लगे 5 जिले हैं। जो इस प्रकार है – कोरबा,सूरजपुर,रायगढ़,जशपुर और बलरामपुर-रामानुजगंज।

सरगुजा में प्रमुख त्योहार करमा,सरहुल व नवाखाई मनाया जाता है। इसके साथ ही साथ अन्य त्यौहार भी विभिन्न समुदायों द्वारा मनाया जाता है।

वहीं प्रमुख नृत्य करमा,सैला(डाण्डा) व डोमकच है।

सरगुजा विश्विद्यालय में शामिल जिले सरगुजा,कोरिया,जशपुर,सूरजपुर और बलरामपुर हैं।

सरगुजा में गोंड,उरांव,कंवर,पण्डो,कोरवा,नगेशिया व अधरिया जनजाति प्रमुखतः निवासरत हैं।

1962 में तिब्बती शरणार्थियों का समुदाय मैनपाट में स्थापित किया गया तब से तिब्बती वहां निवासरत हैं।

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